
आज बुद्ध पूर्णिमा है आज ही बुद्ध का जन्म, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति और उनका इस संसार से विदा लेना महापरिनिर्वाण सब वैशाख पूर्णिमा को ही हुआ. दुखों से भरे संसार में व्याप्त हिंसा, अन्यायपूर्ण व्यवस्था और अंततः मृत्यु से जीवन का अंत ने उन्हें ज्ञान साधना से जीवन के मध्यम मार्ग अर्थात् अपेक्षा उम्मीद और आशा विहीन अपने कर्म पर केन्द्रित रहते हुए सरलता से जीवन जीने की राह को सबके सामने रखा. बुद्ध ने तत्समय की लोकभाषा पालि में अपनी बात जनसाधारण के सामने रखी. उन्होंने कहा अत्तदीपा विहरथ अर्थात Be Island Unto yourself. “Monks, be islands unto yourselves, be your own refuge, having no other; let the Dhamma be an island and a refuge to you, having no other.
नेतरहाट विद्यालय का सूत्र सन्देश है “अत्तदीपा विहरथ”. बौद्ध दर्शन के अर्थपूर्ण सन्देश का निहितार्थ था कि बौद्ध भिक्षु जो सूत्र सन्देश “अत्तदीपा विहरथ” को समझकर स्वयं के या धम्म के द्वीप बनेंगे — Those who are islands unto themselves… should investigate to the very heart of things: ‘What is the source of sorrow, lamentation, pain, grief and despair? How do they arise?’ यही बौद्ध भिक्षुओं और वर्तमान में नेतरहाट से शिक्षित बच्चों से अपेक्षित आदर्श कार्य है …. कर्तव्यनिष्ठ, अहिंसक, प्रेमपूर्ण और सादगी जीवन ही वैशाख पूर्णिमा का सन्देश है.



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