मन मेघपुष्प

मन मेघपुष्प
सब पत्थर.. जड़/ पानी पत्थर/ हवा पत्थर..
स्थिर सृष्टि../ शब्द शिला…/ बोध प्रस्तर..
दृष्टि अश्म../ पाषाण हृदय..
फिर भी, / मन मेघपुष्प
नीलाभ अनन्त की ओर क्यों तक रहा
@अजय नाथ झा

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=10217686077479223&id=1098395232