वोट जिसे देना चाहें दीजिए.. पर वोट जरूर कीजिये.
2014 में 70 लाख 01हजार 442 लोगों ने वोट नहीं दिया था।
आज फिर झारखण्ड विधानसभा चुनाव सामने है. राज्य के 2 करोड़ 30 लाख से अधिक मतदाता पांच चरण में 81 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अपने विधायकों को चुनेंगे.
पर, क्या सब मिलकर चुनेंगे. सन 2014 में 2 करोड़ 08 लाख 52 हजार 803 मतदाताओं पर यह जिम्मेवारी थी. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 70 लाख 01हजार 442 वोटर अपने घरों में ही रह गये. वोट देने घर से निकले ही नहीं. इनमें अधिकांश शहरी क्षेत्र के वोटर थे.
भारत निर्वाचन आयोग के अधीन पूरी कार्यपालिका विधानसभा चुनाव करा रही है. करोड़ों रुपये इसमें खर्च होते हैं.
जानते हैं… होली हो या दीवाली, ईद हो या क्रिसमस..जब आप उत्सव मनाते हैं तब देश जागता है. बाढ़ हो या कोई आपदा.. सीमा पर सेना, ड्यूटी पर पुलिस, डॉक्टर, अधिकारी और कर्मी, सभी अपने निर्धारित कर्तव्य पर बने रहते हैं. चुनाव कराने की जिम्मेवारी चाहे कितनी भी कठिन से कठिन हो, उस ड्यूटी को देश सेवा समझते हुए सब पूरा करते हैं.

जब इतना कुछ होता है तो 2014 में वे 70 लाख लोग जो वोट करने निकले ही नहीं, उनका क्या?? क्या वे वोट के दिन कुछ घंटे देश को नहीं दे सकते हैं?
देश के हज़ारों हाथों के साथ मैं भी हाथ जोड़ कर अपील करता हूँ. पर, क्या देश के लिए अपील करना पड़ेगा? क्या सबकी जिम्मेवारी नहीं है? क्या हम केवल देश से अपेक्षा ही रखेंगे.. खुद के कर्तव्य का अहसास नहीं हो सकता है? क्या आम शहरी वोट के दिन को छुट्टी और मनोरंजन के लिए मानता है? गलत है यह चलन. हर घर के बच्चे वोट के दिन अपने माँ बाप से यह सवाल जरूर करें .. उनसे पूछें कि आपने वोट दिया क्या?

अंत में एक बार फिर…वोट जिसे देना चाहें दीजिए.. पर वोट जरूर कीजिये.
©अजय नाथ झा
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