वह बात जो हमने अपने अनुभवों से जाना और सीखा…

कुछ हासिल हो तो कितनी खुशी होती है और जब भी हम कुछ खोते हैं तो कितनी पीड़ा होती है। पर, नदी की तरह बहते हुए अपने जीवन से मैंने जाना कि हासिल होने और कुछ खोने के क्षणों में ही आपकी परीक्षा भी होती है।
कुछ हासिल होने पर यदि अहंकार उपजता है और अपने आप में वैशिष्ट्य बोध हो रहा हो तो आप मनुष्यता के सबसे निम्न स्तर हैं। कुछ हासिल होने के बाद भी आप विनम्र और सहज बने रहते हैं तो यकीन मानिए आप मनुष्यता के शीर्ष पर हैं।
इसी तरह कुछ खोने से दर्द होना सहज है। दर्द व्यथा और दुख कचनार सी मासूम अनुभूति होते हैं। परन्तु इसके विपर्यय कुछ खोने पर आपका ईर्ष्या भाव, षड्यंत्र प्रवृत्ति और हिंसक हृदय जाग जाये और आप उसी के वशीभूत हो अपना कार्य करने लगे, तो समझ जाइये पाशविक कोटि के मनुष्य हैं –ऐसे में समझ जाइये कि पशु भी आपसे बेहतर हैं।
दूसरी ओर, कुछ खोकर भी आप यदि अपनी पीड़ा में बिखरते नहीं बल्कि, अपनी पीड़ा में और अधिक संकल्पित होते हैं — दृढ़ता से दर्द और दुख की चुनौतियों के सामने खड़े रहते हैं तो समझिए कि आप मनुष्यता के उच्चतम शिखर पर हैं।
आज इतना ही फिर कभी….