इस प्रलय से गुजरना, इसका साक्षी होना और मौत को तमाशा बनते हुए महसूस करना कितना कष्टप्रद है ….आओ अब देख लो भगवन !!
वसुन्धरा डायरी
रविवार, 16 मई 2021
क्या कहूँ…. अमित जी के असमय प्रस्थान को? वसुन्धरा परिवार पर तीसरी त्रासदी!! एक अबूझ हूक सी उठ रही है…क्या समस्त संसार में .. संसार की विधाओं में कोई ऐसा शब्द है जो इस पीड़ा को कम कर सके?? चारो तरफ जिधर देखिये बस एक ही खबर है!! मौत और दर्द अब एक तमाशा बन गया है!
हे महादेव!! इस कॉलोनी परिसर के आप ही रक्षक हैं। प्रत्येक सुबह आपके मन्दिर के सामने इस कॉलोनी के लोग अपनी गलती-सही पर सिर झुकाते, अपने उम्मीद और आस्था को लिए आपके पास समर्पित होते हैं। मैने भी जब से होश संभाला है तब से लेकर आज तक आपको ही अपना आधार माना है। आपके लिये प्रलय बड़ी बात नहीं… सृष्टि के नियमन का हिस्सा है। सब जन्म तुझी से पाते हैं, फिर लौट तुझी में जाते हैं। पर, इस प्रलय से गुजरना, इसका साक्षी होना और मौत को तमाशा बनते हुए महसूस करना कितना कष्टप्रद है ….आओ अब देख लो भगवन !!
फिर से कहता हूं…..
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
अजय नाथ झा, भाप्रसे
A – 902