बोकारो डायरी
सुरक्षित कुआँ – सुरक्षित वन्यजीव
“हम ऐसा कोई कुआँ नहीं छोड़ें जो किसी बेजुबान की आख़िरी मंज़िल बन जाए।”
कभी-कभी किसी बेजुबान की मृत्यु हमें वह सिखा जाती है, जो अनेक पुस्तक और दर्शन भी नहीं सिखा पाते।
27 मई 2025 को बोकारो ज्वाइन करने पर आई एफ एस श्री संदीप शिंदे ने बताया कि…
24 जनवरी 2025… को गोमिया के गोपो गाँव में एक किशोर हाथी रात के अंधेरे में भागते हुए एक खुले कुएँ में गिर गया था और वह फिर कभी बाहर नहीं आ सका।
अगली रात उसका पूरा झुंड उसी स्थान पर लौटा। वनकर्मियों ने बताया कि वे देर तक वहीं खड़े रहे… मानो अपने साथी को अंतिम विदाई दे रहे हों।
कुछ महीनों बाद यही झुंड बदल गया। उसका व्यवहार बदल गया। मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ा। बोकारो रामगढ़ हजारीबाग सहित कई जिलों में अनेक परिवारों ने अपनों को खोया।
एक दिन पहले फिर एक दर्दनाक समाचार मिला।
कसमार के हरनाड गाँव में एक हिरण भी खुले कुएँ में गिरकर अपनी जान गंवा बैठा।
सोचिए…
जिस कुएँ से किसी घर की.. खेतों की प्यास बुझती है, वही यदि किसी बेजुबान के लिए मौत का कारण बन जाए, तो क्या हम उसे सुरक्षित नहीं बना सकते?
जंगली जानवर हमारे गाँवों में लड़ने नहीं आते। वे भी भयभीत होते हैं। रात के अंधेरे में शोर और रोशनी से बचने की कोशिश करते हुए उन्हें खुला कुआँ दिखाई नहीं देता।
एक छोटी-सी मुंडेर…एक मजबूत घेरान…या एक सुरक्षित ढक्कन…
किसी हाथी, हिरण या अन्य वन्यजीव के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकता है।
इसी सोच के साथ, दिशोम गुरु स्वर्गीय श्री शिबू सोरेन जी की पुण्यतिथि पर, जल–जंगल–जमीन और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व के उनके जीवन-दर्शन को विनम्र श्रद्धांजलि स्वरूप, बोकारो जिला प्रशासन “सुरक्षित कुआँ – सुरक्षित वन्यजीव” अभियान का शुभारंभ कर रहा है।
विशेष रूप से गोमिया और पेटरवार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना मुंडेर वाले खुले कुओं का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी बेजुबान वन्यजीव की जान ऐसी दुर्घटनाओं में न जाए।
यह केवल वन्यजीव संरक्षण का अभियान नहीं है।
यह हमारी संवेदना का अभियान है।
यह उस विश्वास का अभियान है कि इस धरती पर जीने का अधिकार केवल मनुष्य का ही नहीं, उन सभी जीवों का भी है जो अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते।
आइए संकल्प लें—
“हम ऐसा कोई कुआँ नहीं छोड़ेंगे जो किसी बेजुबान की आख़िरी मंज़िल बन जाए।”
एक मुंडेर बनाएँ… एक जीवन बचाएँ।
सुरक्षित कुआँ – सुरक्षित वन्यजीव
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