हर जीव में शिव

देर रात लिखी अपनी डायरी का पन्ना साझा करना चाहता हूँ…

बोकारो डायरी
17 अगस्त 2026 (12:35 AM)
श्रावण शुक्ल पञ्चमी

प्रकृति का सम्मान ही भगवान शिव का सम्मान है।
आज सुबह सूर्योदय के साथ श्रावण शुक्ल नाग पञ्चमी और सोमवार की पवित्र तिथि को शिवालयों में पूजा और जलार्पण करेंगे।इस भक्ति और आस्था को सादर नमन। भगवान शिव हमारे बोकारो को हरित, सुरक्षित, संवेदनशील और समृद्ध बनायें।
भगवान शिव का स्वरूप प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का एक अद्भुत जीवन-दर्शन है। उनकी जटाओं में माँ गंगा हैं, मस्तक पर चन्द्रमा, गले में नाग, साथ में नंदी और निवास कैलाश में है। ऐसा लगता है मानो महादेव का सम्पूर्ण स्वरूप प्रकृति का ही विराट निदर्शन है।
नागपंचमी भी इसी भारतीय चेतना का सुंदर उदाहरण है-हमारी प्रकृति और संस्कृति का हिस्सा है- महादेव के कंठ का आभूषण है, अर्थात् प्रकृति में हर जीव का अपना महत्व है।
आज जब जलवायु परिवर्तन, घटती हरियाली और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियाँ हमारे सामने हैं, तब हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का यह संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
भगवान शिव पर जलार्पण; प्रकृति में जल की पवित्रता का और जल संरक्षण के महत्व का ही प्रतीक है। विल्वपत्र, धतूरा आदि का अर्पण आरोग्य वन के महत्व और उसका संरक्षण ही शिव-आराधना है।
आज मैं अपने बोकारो की युवा पीढ़ी से भी कुछ कहना चाहता हूँ। आप एक ऐसी पीढ़ी हैं जिसके हाथ में ज्ञान और तकनीक की अभूतपूर्व शक्ति है। दुनिया आपकी स्क्रीन पर है। लेकिन भागते हुए इस जीवन में महायोगी शिव हमें संतुलन का महत्व याद दिलाते हैं। हर नोटिफिकेशन, हर ट्रेंड को फॉलो करना और हर ओपिनियन पर रिएक्शन देना यही जीवन नहीं है। कभी-कभी स्क्रीन से बाहर निकलकर प्रकृति और स्वयं से जुड़ना भी जरूरी है।
शिव का नीलकंठ स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में विष रूप में क्रिटिसिज्म, रिजेक्शन, फेलियर और नकारात्मकता आएँगे। इस विष से बचा नहीं जा सकता, लेकिन उसे अपने कंठ में ही रोकते हुए अपने हृदय का-अपने मन का हिस्सा बनने से अवश्य रोका जा सकता है।

महादेव का तीसरा नेत्र आज हमें सही और गलत के बीच अंतर करने वाला विवेक के रूप में हमें धारण करने की प्रेरणा देता है।

और, महायोगी की सादगी हमें समझाती है कि सफलता का अर्थ केवल अधिक पाना नहीं, शक्ति का अर्थ प्रदर्शन नहीं और आधुनिक होने का अर्थ प्रकृति से दूर होना नहीं है।

और अंत में, इतना ही कहूंगा कि शिव केवल आराध्य नहीं, वह संतुलन का जीवन-दर्शन भी हैं—मनुष्य और प्रकृति के बीच, शक्ति और करुणा के बीच, तकनीक और संवेदना के बीच एवं अपेक्षाओं और आत्मशांति के बीच संतुलन का जीवन दर्शन है।
हमारे युवा यदि इस संतुलन को साध ले, तो उनका और हमारी धरती का भविष्य भी भव्य और सुरक्षित होगा।

अजय नाथ झा (भाप्रसे)
जिला कलेक्टर सह उपायुक्त
बोकारो

हर जीव में शिव

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ajaynathjha

साधक है समता के सत्य न्याय करूणा के ! हिन्द प्रेम सम्बल है, विश्व प्रेम साध्य बना ।।

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